Friday, September 23, 2011

मनोकामना पूर्ति हेतु रामचरितमानस के कुछ सिद्ध मंत्र


मनोकामना पूर्ति हेतु रामचरितमानस के कुछ सिद्ध मंत्र
रामचरितमानस अपने आप मे एक सिद्ध ग्रन्थ है | जिसके पीछे संत शिरोमणि तुलसीदास जी का तप है | रामचरितमानस का मनन व श्रवण अपने आप में एक सुखद अनुभव है और जीवन जीने की कला सिखाता है | मानस की हर एक वाक्य सिद्ध मंत्र है | प्रस्तुत लेख में मानस के कुछ मंत्र जीवन को सरल बनाने व जीवन में उन्नति हेतु दिए जा रहे है |
२८ सितम्बर २०११ से नवरात्र प्रारंभ हो रहे है | इन मंत्रों को नवरात्रों में प्रारंभ करे और अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाये | नवरात्रों में देवी, शक्ति, भगवान राम, हनुमान जी व अपने ईस्ट की उपासना का विशेष महत्व है | ये मंत्र सरल बोलचाल की भाषा में है और प्रक्रिया में किसी कमी से कोई भी नुकसान नहीं होता | इन मंत्रों को शाबर मंत्रों की श्रेणी में ले सकते है |
 
विद्या प्राप्ति का मंत्र
गुरु गृह गए पढ़न रघुराई
अल्प काल विद्या सब आई
नौकरी अथवा साक्षात्कार के लिए मंत्र
इस मंत्र को शुक्ल पक्ष के सोमवार से अमृत या लाभ के चौघडिये से शुरू करें एवं सवा लाख मंत्रों का जाप करें।
विश्व भरण पोषण कर जोई, ताकर नाम भरत अस होई
गई बहोर गरीब नेवाजू , सरल सबल साहिब रघुराजू ॥
                                                                                                              
शीघ्र विवाह के लिए मंत्र
शीघ्र विवाह के लिए इस मंत्र का जाप पुष्य नक्षत्र में प्रारम्भ करें। प्रातः काल और सायं काल तुलसी के पास बैठ कर घी का दीपक जलाकर निम्न मंत्र की एक माला करे। ४१ दिनों में सफलता मिल सकती है।
तव जनक पाय वसिष्ठ आय सु ब्याह साजी संवारी के
मांडवी श्रुति की रति उरमिला कुंअरी लई हंकारी के ॥

शीघ्र विवाह के लिए एक और मंत्र
तुलसी की माला से रामचरित मानस की निम्न चौपाई का १०८ बार नित्य पाठ करना शीघ्र विवाह के लिए दिव्य प्रयोग है। राम सीता की फोटो सामने रखें।
सुनि सिय सत्य असीस हमारी।
पूजिहि मन कामना तिहारी ॥

धन प्राप्ति साधना
जिमी सरिता सागर महूँ जाही , यद्यपि ताहि कामना नाही ।
तिमि सुख सम्पति बिनहि बोलाए , धरम सील पहँ जाही सुभाए ॥
प्रति दिन प्रातः काल इस मंत्र का १०८ बार जप करें। इससे धन की प्राप्ति होती है।

यात्रा की सफलता का मंत्र
प्रबिसि नगर कीजे सब काजा।
ह्रदय राखि कौशलपुर राजा ॥
१०००० बार जपकर इस मंत्र को सिद्ध करले। जब भी यात्रा पर जाए, थोडे जल को इस मंत्र से सात बार शक्तिकृत करके अपने आगे और ऊपर छिड़अकले, आप जिस उद्देश्य से यात्रा पर जायेंगे उसमे सफलता मिलेगी।

संकट टालने का मंत्र
जो प्रभु दीनदयाल कहावा । आरति हरन बेद जस गावा॥
जपहि नामु जन आरत भारी। मिटहि कुसंकट होहिं सुखारी ॥
दीनदयाल बिरद सम्भारी । हरहु नाथ मम संकट भारी ॥
प्रभु राम की प्रतिमा के सामने लाल कम्बल के आसन पर रात भर इस मंत्र के जप से संकट टल जाते है।

हनुमानजी से कार्य करवाने का मंत्र
कवन सो काज कठिन जग माही।
जो नही होई तात तुम पाही॥
मंगलवार के दिन हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढा कर इस मंत्र के १०००० जप करे। इस तरह हनुमानजी को अपना कार्य कराने के लिए प्रेरित किया जाता है।

भाग्य जगाने का मंत्र
मंत्र महामुनि विषय ब्याल के।
मेटत कठिन कुअंक भाल के॥
हल्दी की गांठ की माला बना करके इस मन्त्र की ग्यारह माला प्रतिदिन करने से भाग्य की विडम्ब नाओ का नाश होता है।

रोग मिटाने का राम मंत्र
राम कृपा नासहि सब रोगा।
जौं एही भांति बने संजोगा॥

मन की शान्ति के लिए राम मंत्र
राम राम कहि राम कहि। राम राम कहि राम॥
प्रभु राम की तरफ़ ध्यान केंद्रित कर नेत्र बंद करके अधिक से अधिक जप करें। इस प्रयोग को २१ दिन तक करे । तत्पश्चात इस मंत्र के प्रयोग से मन प्रभु राम में लीन हो जाता है जिससे मन को शान्ति मिलती है।

राम भक्ति भावना बढ़ाने का मंत्र
सीताराम चरण रति मोरे।
अनुदिन बढ़ाऊ अनुग्रह तोरे॥
सुबह उठने के पश्चात् इस मंत्र को १०८ पढ़ना चाहिए। इस मंत्र से श्री राम जानकी के प्रति भक्ति भावना बढ़ती है

श्री जानकी जी के दर्शन के लिए
जनकसुता जग जननि जानकी ।
अतिसय प्रिय करुनानिधान की॥

श्री सीताराम दर्शन के लिए
नील सरोरुह नील मणि, नील नीलधर श्याम ।
लाजही तन शोभा निरखि कोटि कोटि सत काम ॥


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Saturday, August 27, 2011

गणेश चतुर्थी Ganesh Chaturthi

01/09/2011 को गणेश चतुर्थी पर चंद्र दर्शन निषेध



 
प्रत्येक शुक्ल पक्ष चतुर्थी को चन्द्रदर्शन के पश्चात्‌ व्रती को आहार लेने का निर्देश है, इसके पूर्व नहीं। किंतु भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रात्रि में चन्द्र-दर्शन (चन्द्रमा देखने को) निषिद्ध किया गया है।
जो व्यक्ति इस रात्रि को चन्द्रमा को देखते हैं उन्हें झूठा-कलंक प्राप्त होता है। ऐसा शास्त्रों का निर्देश है। यह अनुभूत भी है। इस गणेश चतुर्थी को चन्द्र-दर्शन करने वाले व्यक्तियों को उक्त परिणाम अनुभूत हुए, इसमें संशय नहीं है। 
इस दिन चांद के दर्शन करने से भगवान श्री कृष्ण को भी मणि चोरी का कलंक लगा था । 

यदि जाने-अनजाने में चन्द्रमा दिख भी जाए तो निम्न मंत्र का पाठ अवश्य कर लेना चाहिए-
    'सिहः प्रसेनम्‌ अवधीत्‌, सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्वमन्तकः॥'

भाद्रपद्र शुक्ल की चतुर्थी ही गणेश चतुर्थी कहलाती है । श्री गणोश विध्न विनाशक है । इन्हें देव समाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है । भाद्रपद्र कृष्ण चतुर्थी को गणेश जी की उत्पत्ति हुई थी, उनका गजानन रुप में जन्म भाद्रपद शुक्ल चौथ को हुआ ।
श्री गणेश जी बुध्दि के देवता है । उनका वाहन चूहा है । इनका सर्वप्रिय भोग मोदक है । इस दिन प्रात:काल स्नानादि करके सोने, चांदी, तांबे अथवा मिट्टी की गणेश जी की प्रतिमा बनाई जाती है । गणेश जी की इस प्रतिमा को कोरे कलश में जल भरकर मुंह पर कोरा कपड़ा बांधकर उस पर स्थापित किया जाता है । मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाकर षोड्शोपचार से उनका पूजन करना चाहिए तथा दक्षिणा अर्पित करके 21 लडडुओं का भोग करने का विधान है । इनमें से पांच लडडू गणेश जी की प्रतिमा के पास रखकर शेष ब्राम्हणों में बांट देना चाहिए । गणेश जी की पूजा सायंकाल के समय की जानी चाहिए । 
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Wednesday, August 17, 2011

Shree Mahalaxmi Astkam / श्री महालक्ष्मी अष्टकम

श्री महालक्ष्मी अष्टकम


धन दायक महालक्ष्मी की पूजा  सभी प्रकार की दरिद्रता का नाश करती है | अपने शुभ कर्मो के साथ साथ महालक्ष्मी अष्टक का नियमित पाठ आपको धन की कमी नहीं अखरने देगा |
 
नमस्तेस्तु महामाये श्री पीठे सुर पूजिते !
शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

नमस्तेतु गरुदारुढै कोलासुर भयंकरी !
सर्वपाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

सर्वज्ञे सर्व वरदे सर्व दुष्ट भयंकरी !
सर्वदुख हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

सिद्धि बुद्धि प्रदे देवी भक्ति मुक्ति प्रदायनी !
मंत्र मुर्ते सदा देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

आध्यंतरहीते देवी आद्य शक्ति महेश्वरी !
योगजे योग सम्भुते महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

स्थूल सुक्ष्मे महारोद्रे महाशक्ति महोदरे !
महापाप हरे देवी महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

पद्मासन स्थिते देवी परब्रह्म स्वरूपिणी !
परमेशी जगत माता महालक्ष्मी नमोस्तुते !!

श्वेताम्भर धरे देवी नानालन्कार भुषिते !
जगत स्थिते जगंमाते महालक्ष्मी नमोस्तुते !!
Namastetu Mahaamaaye Shree peetthey Surpoojitey
Shankha chakra gadaa hastey
Mahaalaxmi Namostutey

Namastey Garooda roodhey

Kola asura bhayankari
Sarva paapa harey Devi
Mahaa Laxmi Namostutey

Sarvagyey Sarvey-Varadey

Sarva-dushta Bhayankaree
Sarva-dukha harey Devi
MahaLaxmi Namostutey.

Sidhee- Budhee pradey Devi,

Bhukti Mukti pradaayanee,
Mantra-Moortey sadaa Devi,
MahaLaxmi Namostutey.

Aadi-Anta rahitey Devi,

Aadi- Shakti Maheshwari,
Yogajey Yogasambhutey,
MahaaLaxmi namostutey.

Sthoola Sukshma Mahaa roudrey

MahaaShakti Mahodarey
Mahaa paapa harey Devi,
MahaaLaxmi Namostutey

Padma Aasan Sthitey Devi,

Para Brahma Svaroopini,
Parmeshi Jagan Maatar,
MahaLaxmi Namostutey.

Shwet Aambar dharey Devi,

Nana Alankaara Bhooshitey,
Jagat Sthitey Jagan Matar,
MahaaLaxmi Namostutey.
महालक्ष्मी अष्टक स्तोत्रं य: पठेत भक्तिमान्नर:!  सर्वसिद्धि मवाप्नोती राज्यम् प्राप्नोति सर्वदा !!

एक कालम पठेनित्यम महापापविनाशनम !  द्विकालम य: पठेनित्यम धनधान्यम समन्वित: !!

त्रिकालम य: पठेनित्यम महाशत्रुविनाषम !  महालक्ष्मी भवेनित्यम प्रसंनाम वरदाम शुभाम !! 

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