Saturday, May 14, 2016

साप्ताहिक राशिफल दिनांक 15 मई से 21 मई 2016 तक

साप्ताहिक राशिफल

दिनांक 15 मई से 21 मई 2016 तक
निम्रलिखित राशिफल वर्तमान ग्रहों के गोचर का आपकी जन्म राशि, जिसे चन्द्रराशि भी कहते हैं पर पडऩेवाले प्रभावों को दर्शाता है। आपकी जन्मपत्रिका के हिसाब से इसमें कम, ज्यादा अन्तर आने की सम्भावना हो सकती है। - आचार्य अनुपम जौली

मेष : इस सप्ताह कठिन समय में भी आपके कार्यों की गति सामान्य से कुछ बेहतर रहेगी। जीवनसाथी के सहयोग से लाभ का मार्ग प्रशस्त होगा। शिक्षा सम्बन्धि कार्यों में अड़चने निरन्तर बनी हुई है।
सूर्य को जल चढ़ायें व आदित्य हृदय स्त्रोत्र का पाठ करें।

वृषभ : सप्ताह की शुरूआत तो मानसिक चिन्ता, खर्चों व अड़चनों के साथ हो रही है। परन्तु सप्ताहन्त में आपका वर्चस्व व स्वास्थ्य में उन्नत्ति के योग बन रहें हैं। करियर में संघर्ष की स्थिति बन रही है।
दुर्गा चालिसा का निरंतर पाठ करें।

मिथुन : इस सप्ताह यात्रा व खर्चों के योग है। नये पुराने मित्र मिलेगें। स्वास्थ्य का पाया कमजोर है। विवाह के प्रस्ताव प्राप्त होगें। सुविधओं का अभाव मानसिक चिन्ता का कारण बनेगा।
लक्ष्मी जी की पूजा सदैव सुखदायी रहेगी।

कर्क : इस सप्ताह पारिवारिक चिन्ताऐं परेशानी का कारण बनेगी। बाहरी सहयोग से कार्यक्षेत्र में उन्नत्ति के योग बन रहे है। धन लाभ के भी नवीन अवसरों का सृजन होगा। सप्ताहन्त स्वास्थ्य के लिये कष्टकर रहेगा।
शनिवार को हनुमान मंदिर में चोला चढ़ायें।

सिंह : सप्ताह परिवर्तनशील है। कार्यक्षेत्र में नवीन परिवर्तन के योग बन रहें हैं। साथ ही सामाजिक कार्यों में भी आपका योगदान बडऩे की स्थिति बन रही है। वैवाहिक जीवन में कुछ अड़चने बनी रहेगी।
नित्यप्रति सूर्यदेव को जल अर्पित करें।

कन्या : इस सप्ताह बड़े खर्चे व यात्राओं के योग बन रहे है। अपने बजट को नियंत्रित करके चलने में ही भलाई है। मित्रों से कष्ट प्राप्त हो सकता है। स्वास्थ्य का पाया कमजोर है।
गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ करें।

तुला : यह सप्ताह मिश्रित फलप्रद है। लाभ व हानि दोनों योगों की वजह से अभी जोखिम लेना ठीक नहीं। पारिवारिक क्लेश का भी वातावरण बना हुआ है। खान पान की लापरवाही स्वास्थ्य सम्बन्धि कष्ट दे सकति है।
हनुमान चालिसा का पाठ करें।

वृश्चिक : सप्तारम्भ में किये कार्यों में सफ लता प्राप्ति के योग अधिक है। नौकरी व व्यापारी वर्ग दोनों के लिये समय शुभ लाभकारी है। शत्रुओं में निरन्तर वृद्धि की स्थिति बनी हुई है।
गणेश जी को दूब चढ़ायें।

धनु : इस सप्ताह उत्तरोत्तर उन्नत्ति के योग बन रहे है। विगत में चली आ रही समस्या का हल प्राप्त होगा। प्रेम प्रसंगों में संघर्ष की स्थिति बन रही है। मित्रों से कष्ट हो सकता है अत: संभलकर चलें।
हनुमान चालीसा का पाठ से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलेगी।

मकर : सप्तारम्भ में स्वास्थ्य व धन हानि के योग बन रहें हैं। अत: शुभ कार्यों को शुरूआत में टालना ही लाभकारी रहेगा। सप्ताहन्त में कार्यों में सफ लता व प्रेम प्रसंगों में आशानुकूल परिणाम प्राप्ति के योग बन रहे हैं।
शनि मंदिर में काले उड़द व काले तिल कड़वे तेल में डालकर चढ़ायें।

कुंभ : इस सप्ताह श्रम अधिक व परिणाम न्यून होने से मानसिक खिन्नता बनी रहेगी। घर के बुजुर्गों के सहयोग द्वारा किये कार्यों में प्रगति के योग बन रहे हैं। स्वास्थय का पाया कमजोर है।
गणपति जी की उपासना आपके लिये लाभकारी सिद्ध होगी।

मीन : इस सप्ताह का आरम्भ आपके वर्चस्व को बढ़ाने वाला साबित होगा। समय मौज शौक में व्यतीत होगा। सप्ताहन्त में सुविधाओं का अभाव व अड़चने कष्टकारी रहेगीं।
शिव चालिसा का पाठ करें।

Saturday, May 7, 2016

साप्ताहिक राशिफल

साप्ताहिक राशिफल


दिनांक 08 मई से 14 मई 2016 तक

निम्रलिखित राशिफल वर्तमान ग्रहों के गोचर का आपकी जन्म राशि, जिसे चन्द्रराशि भी कहते हैं पर पडऩेवाले प्रभावों को दर्शाता है। आपकी जन्मपत्रिका के हिसाब से इसमें कम, ज्यादा अन्तर आने की सम्भावना हो सकती है।                                                                                               - आचार्य अनुपम जौली

मेष : इस सप्ताह रचनात्मक व सामाजिक कार्यों में रूझान बढ़ेगा। परिवार में सामंजस्य बनाकर चलें अन्यथा हानी उठानी पड़ सकती है। शिक्षा में संघर्ष के साथ उन्नत्ति के योग बन रहे हैं।

सूर्य को जल चढ़ायें व आदित्य हृदय स्त्रोत्र का पाठ करें।

वृषभ : इस सप्ताह पारिवारिक या मांगलिक कार्यों पर खर्चों के योग बन रहे है। नवीन शुभ सूचना का संचार होगा। नये पुराने मित्र मिलेगें। यात्रा योग है। सप्ताहन्त में मानसिक चिन्ताओं से ग्रसित होने की स्थिति बन रही है।
दुर्गा चालिसा का निरंतर पाठ करें।

मिथुन : यह सप्ताह शुभ लाभकारी बना हुआ है। अत: आलस्य त्याग कर कार्यों में जुट जायें। यात्रा व खर्चों के योग बन रहे हैं। धार्मिक कार्यों में रूझान बढ़ेगा। कारोबारी प्रस्ताव प्राप्त होगें।

लक्ष्मी जी की पूजा सदैव सुखदायी रहेगी।

कर्क : सप्ताह उतार चढ़ाव पूर्ण रहेगा। धन लाभ के अवसरों के साथ साथ बड़े खर्चों के भी योग बन रहे हैं। कार्यक्षेत्र सम्बन्धित यात्रा से लाभ के योग बन रहे हैं। परन्तु शिक्षा व प्रेम प्रसंगों में आशानुकूल परिणाम प्राप्त नहीं होगें।

शनिवार को हनुमान मंदिर में चोला चढ़ायें।

सिंह : इस सप्ताह कार्यक्षेत्र की व्यस्तता भरपूर रहेगी। नये लाभकारी प्रस्ताव भी प्राप्त होगें। आपके अपने प्रयासों का फल भी आशानुकूल मिलेगा। सप्ताहन्त में खर्चों के योग बन रहे हैं।

नित्यप्रति सूर्यदेव को जल अर्पित करें।

कन्या : इस सप्ताह संघर्ष के साथ कार्यों में उन्नत्ति के योग बन रहे हैं। मित्रों या सहकर्मियों से कष्ट की संभावना है। स्व निर्णय अभी गलत साबित हो रहे है। अत: नवीन योजनओं को अभी टालने में ही भलाई है।

गणपति अथर्वशीर्ष के पाठ करें।

तुला : सप्तारम्भ का समय आपके अनुकूल नही है। कार्यों में देरी व अड़चनें मानसिक कष्ट प्रदाता रहेगी। शेष सप्ताह आपके अनुकूल है। लाभकारी व्यापारिक प्रस्ताव प्राप्त होगें। वाणी पर संयम रक्खें।

हनुमान चालिसा का पाठ करें।

वृश्चिक : यह सप्ताह अत्यन्त संघर्षपूर्ण है। विरोधियों की संख्या बढऩे से मानसिक कष्ट बढ़ेगा। स्वास्थ्य का पाया कमजोर है। अपने व्यवहार में आ रहे क्रोध व जिद्दी स्वभाव पर नियंत्रण रक्खें।

गणेश जी को दूब चढ़ायें।

धनु : सप्तारम्भ में मिल रही सुविधाऐं सप्ताहन्त में नहीं मिलेगी। जीवनसाथी के सहयोग से लाभ का मार्ग प्रशस्त होगा। सप्ताहन्त में नवीन निवेश टालें। कष्टकर यात्रा के योग बन रहे है।

हनुमान चालीसा का पाठ से सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलेगी।

मकर : इस सप्ताह शिक्षा में अवरोध व स्वास्थ्य का पाया कमजोर है। धन लाभ व व्यापारिक प्रस्ताव के नवीन अवसर प्राप्त होगें। जमीन, मकान व वाहन सम्बन्धि कार्यों में कुछ अड़चनों के बाद सफलता के योग है।

शनि मंदिर में काले उड़द व काले तिल कड़वे तेल में डालकर चढ़ायें।

कुंभ : इस सप्ताह की शुरूआत मानसिक चिन्ताओं व अवरोधों से परीपूर्ण रहेगी। परन्तु सप्ताहन्त में रूके कार्यों में तेजी तो आयेगी ही साथ सफलता भी प्राप्त होगी। मित्रों का सहयोग मिलेगा।

गणपति जी की उपासना आपके लिये लाभकारी सिद्ध होगी।

मीन : इस सप्ताह नये पुराने मित्र मिलेगें। सामाजिक कार्यों में योगदान बढ़ेगा। पारिवारिक समस्या का समाधान मिलेगा। कार्यक्षेत्र में परिवर्तन के योग बन रहे है। यात्रा योग है।

शिव चालिसा का पाठ करें।

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Wednesday, May 4, 2016

राजयोग विचार



उच्चपदासीन राजयोग-
१.     यदि लग्रेश केन्द्र में हो और अपने मित्र ग्रहों से दृष्ट हो तथा लग्र में शुभग्रह हों तो जातक न्यायाधीश अथवा विधिमंत्री आदि पद प्राप्त करता है।
२.     यदि पूर्ण चन्द्र जलचर राशि के नवमांश में चतुर्थ भावस्थ हो, स्वराशिस्थ शुभग्रह लग्र में हो तथा केन्द्र में पापग्रह न हो तो ऐसा जातक राजदूत अथवा गुप्तचर विभाग में किसी उच्च पद को प्राप्त करता है।
३.     किसी ग्रह की उच्च राशि लग्र में हो, वह ग्रह यदि अपने नवांश अथवा मित्र अथवा उच्च के नवांश में केन्द्रगत शुभाग्रह से दृष्ट हो तो ऐसा जातक शासनधिकारी का पद प्राप्त करता है।

उच्चपद कारक योग
जब दो या दो से अधिक ग्रह उच्चस्थ या स्वराशिस्थ होकर परस्पर केन्द्रों में और लग्र से भी केन्द्र में हो तो कारक योग होता है जो धनी व उच्च पद का अधिकारी बनाता है। जब जन्म लग्रप ही नवमांश लग्र हो। सूर्य से द्वितीय भाव में शुभग्रह हो। कुण्डली में चारों केन्द्रों में ग्रह हो, कारक योग हो इनमें से कोई भी योग होने पर व्यक्ति धनी व उच्च पदाधिकारीयोग बन जाता है।

धनी यशस्वी राज्याधिकारी योग -
१.     लग्र से केन्द्रों में शुभग्रह षष्ठ अष्टम भाव रिक्त हों या इनमें शुभग्रह स्थित हो।
२.     लग्र और व्यय के स्वामी परस्पर केन्द्रगत मित्र ग्रहों से दृष्ट हों।
३.     लग्रेश जिस राशि में स्थित हो उस राशि का स्वामी स्वक्षेत्रीय या उच्चस्थ होकर केन्द्र में स्थित हो।
४.     मेश लग्र में मंगल दशमस्थ शनि के साथ स्थित हो, गुरु से भी दृष्ट हो।
५.     कर्क लग्र में चन्द्र कर्क में बुध सप्तम में होने पर शुभग्रह केन्द्रस्थ हो और षष्ठ व अष्टम में शुक्र गुरु उदित हों और उनके साथ धनेश सूर्य अष्टम में हों।
६.     चन्द्र लग्रेश व लग्रेश दोनों एकत्र केन्द्रस्थ होकर अधिमित्र ग्रह से दृष्ट हो तथा लग्र को बली ग्रह देखता हों।
७.     सूर्य से बुध द्वितीय से हो बुध, से चन्द्र एकादश में हो चन्द्र से गुरु नवम भावस्थ हो, तुला लग्र में सूर्य व्यय में बुध लगन में चन्द्र एकादश में और गुरु  सप्तम भावस्ाि हों।
८.     गुरु से केन्द्र में शुक्र हो और दशमेश बलवान हों।
९.     १,२,६,१२ भावों में ग्रह स्थित हों दशमेश बलवान हों।
१०.    किसी पुरुष का दिन में जन्म हो और लग्र चन्द्र लग्र, सूर्य लग्र तीनों विषम राशि में हों।
११.    किसी स्त्री का जन्म रात्रि में हो और तीनों लग्र में चन्द्र लग्र, सूर्य लग्र समराशि हों।
१२.    किसी स्त्री का जन्म रात्रि में हो और तीनों लग्र सम राशि में हो।
१३.    उच्चस्थ ग्रह जिस नवमांश में हो उसका स्वामी उच्च राशि का केन्द्रस्थ हो और लग्रेश बली हो।
१४.    लग्र में ३ शुभग्रह हो।
१५.    लग्र में ३ पापग्रह से दरिद्री, अपमानित रोगी चिन्तित योग बनता है।
१६.    नवमेश तथा शुक्र उच्च राशि अथवा स्वराशि में स्थित होकर केन्द्र त्रिकोण में हो।
१७.    उच्चराशिगत नवमेश, स्वराशि या मूल त्रिकोण में नवमेश लग्र से केन्द्र में हो।
१८.    जब कोई ग्रह अधिकतर लग्रों का मित्र होता हुआ पंचमस्थ या अन्य धनप्रद भावस्थ राहु केतु जिस राशि में हों उसका स्वामी हो और बलवान् हो तो लाटरी धन लाभ होता है।
१९.    जन्म लग्र या चन्द्र लग्र ६,७,८ भाव में शुभग्रह हों अथवा दोनों लग्र में से किसी से ३,६,१०,११ भाव में शुभग्रह हों।
२०.    सूर्य से द्वितीय भाव में चन्द्र को छोडक़र कोई ग्रह हों अथवा सूर्य से व्यय भाव में चन्द्र को छोडक़र कोई ग्रह हो अथवा सूर्य से द्वितीय और द्वादश भाव चन्द्र को छोडक़र अन्य ग्रह हों अथवा चन्द्र से द्वितीय और द्वादश में सूर्य को छोडक़र अन्य ग्रह हों।
२१.    चन्द्र से द्वितीय में सूर्य छोडक़र सूर्य ग्रह हो या सूर्य से व्यय में सूर्य को छोडक़र अन्य ग्रह हो अथवा चन्द्र से द्वितीय और द्वादश में सूर्य को छोडक़र अन्य ग्रह हो।
२२.    यदि सप्तमेश दशम भाव में उच्च राशिगत हो। अथवा दशमेश भागयेश का योग हो उपर्युक्त सभी योग धनी यशस्वी, राज्याधिकाीर आदि शुभ योग कारक है।
२२.    द्वितीय व पंचम भाव में बुध, गुरु, शुक्र स्थित हो अथवा गुरु बुध या शुक्र की राशि में स्थित हो तो श्रेष्ठ संगीतज्ञ योग बनता है।
दशमेश पंचम में बुध केन्द्र में हो, सूर्य सिंह राशि में हो तो शारदा योग बनता है अथवा चन्द्र से नवम पंचम गुरु हो और गुरु बुध से लाभ में हो।

शुक्र, गुरु तथा बुध केन्द्र में या त्रिकोण में हो अथवा यही तीन शुभग्रह धन भाव में अपने उच्च या मित्र ग्रह की राशि में हो और गुरु बलवान हो तो सरस्वती योग बनाकर व्यकित को कवि, शास्त्रज्ञ, ग्रन्थकर्ता, धनी, स्त्री, पुत्र से युक्त व राज्य सम्मानित करता है।

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Saturday, November 15, 2014

रामचरित मानस के चौपाई से बेडा पार लगायेगे श्री हनुमान जी

चमत्कारिक रामचरित मानस की चौपाइयां 

ग्रंथो के अनुसार कलयुग में श्री हनुमान जी की ही शक्ति निर्बल इंसान को सहायता प्रदान करेगी | कलयुग में संस्कृत के मंत्र, जिनका उच्चारण व प्रयोग न सिर्फ बहुत कठिन है उससे लाभ प्राप्ति के लिए भी बहुत तप इत्यादि की आवश्यकता पड़ती है | ऐसे में भगवान राम व हनुमान भक्त गोस्वामी तुलसीदास जी ने जन बोलचाल की भाषा में रामचरित मानस की रचना की | और वाराणसी में भगवान शंकर ने मानस की चौपाइयों को मंत्र शक्ति प्रदान की |

रामचरित मानस की सभी चौपाइयों के अर्थो के अनुसार मानव के मनोरथ सिद्ध होते है | मानस सिद्ध मंत्र का विधान यह है की पहले रात को दस बजे के बाद अष्टांग हवन के द्वारा सिद्ध करना चाहिए | फिर जिस जिस कार्य के लिए मंत्र जप की आवश्यकता हो उसके लिए नित्य जप करना चाहिए |

जिस उद्देश्य की पूर्ति के लिए जिस चौपाई का जप बतलाया गया है उसको सिद्ध करने के लिए सर्व प्रथम श्री हनुमान जी की आशीर्वाद मुद्रा वाली तस्वीर या मूर्ति अथवा रामदरबार की तस्वीर या मूर्ति के समक्ष अष्टांग हवन जिसकी सामग्री होगी - १) चन्दन का बुरादा २) तिल ३) शुद्ध देसी घी ४) सुद्ध शक्कर ५) अगर ६) तगर ७) कपूर ८) सुद्ध केसर ९) नागरमोथा १०) पंचमेवा ११) जौ १२) चावल से उसी चौपाई द्वारा १०८ बार हवन करना चाहिए | हवन की प्रत्येक आहुति में चौपाई आदि के अंत में 'स्वाहा' शब्द का उच्चारण करना चाहिए | उपरोक्त सामग्री में पंचमेवा में पिश्ता, बादाम, किशमिश, अखरोट और काजू ले सकते है |

एक दिन हवन करने से मानस के मंत्र सिद्ध हो जाते है | इसके पश्चात जब तक की कार्य सफल न हो जाय तब तक उस चौपाई का जप प्रतिदिन एक माला अर्थात एक सौ आठ बार जपना चाहिए |

विविध कामना सिद्धि के कुछ मानता निम्न लिखित है जिनसे आप लाभ प्राप्त कर सकते है :-

1) मुकदमे में जीत हेतु -
पवन तनय बल पवन सामना, बुद्धि बिबेक बिज्ञान निधाना |
कवन सो काज कठिन जग माही, जो नहीं होइ तात तुम पाहि ||

2) श्री हनुमान जी की प्रसन्नता प्राप्ति के लिए -
सुमिरि पवनसुत पावन नामू | अपने बस करी राखे रामू ||

3) मस्तिष्क की पीड़ा दूर करने के लिए -
हनुमान अंगद रन गाजे | हाँक सुनत रजनीचर भाजे ||

4) डर व भूत भागने का मंत्र -
प्रनवउँ पवनकुमार खेल बन पावक ग्यान घन |
जासु हृदय अगर बसहि राम सर चाप धार ||

5) ज्ञान-प्राप्ति के लिये-
“छिति जल पावक गगन समीरा। पंच रचित अति अधम सरीरा।।”

6) यात्रा की सफलता के लिए-
“प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। ह्रदयँ राखि कोसलपुर राजा॥”

7)  विवाह के लिये-
“तब जनक पाइ वशिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै।
मांडवी श्रुतकीरति उरमिला, कुँअरि लई हँकारि कै॥”

8) शत्रुता समाप्ति हेतु -
“बयरु न कर काहू सन कोई। राम प्रताप विषमता खोई॥”

9) मनचाहे कार्यों की सफलता हेतु -
“भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि।
तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि।।”

10) काम धंदे के लिये
“बिस्व भरण पोषन कर जोई। ताकर नाम भरत जस होई।।”

11) गरीबी समाप्ति हेतु -
“अतिथि पूज्य प्रियतम पुरारि के। कामद धन दारिद दवारि के।।”

12) विविध रोगों तथा उपद्रवों की शान्ति के लिये
“दैहिक दैविक भौतिक तापा।राम राज काहूहिं नहि ब्यापा॥”

13) शिक्षा में सफ़लता के लिये
“जेहि पर कृपा करहिं जनु जानी। कबि उर अजिर नचावहिं बानी॥
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती। जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती॥”

14) संकट-नाश के लिये
“जौं प्रभु दीन दयालु कहावा। आरति हरन बेद जसु गावा।।
जपहिं नामु जन आरत भारी। मिटहिं कुसंकट होहिं सुखारी।।

दीन दयाल बिरिदु संभारी। हरहु नाथ मम संकट भारी।।”

अधिक जानकारी के लिए निम्न वेबसाइट पर जा सकते है :-

Wednesday, November 5, 2014

कार्तिक पूर्णिमा का महात्मय

कार्तिक पूर्णिमा


व्रत व तप की दृष्टि से कार्तिक मास का विशेष महत्व है | स्कन्द पुराण में कहा भी गया है की-
" न कार्तिकसमो मासो न कृतेन समम युग्म |
न वेदसदृशम् शास्त्रं न तीर्थम गंगया समम ||"
अर्थात कार्तिक के सामान दूसरा कोई मास नहीं, सत्ययुग के सामान कोई युग नहीं, वेदों के सामान कोई शास्त्र नहीं और गंगा जी के सामान कोई तीर्थ नहीं है | कार्तिक मास ऐसा मास है की इसकी अमावस्या एवं पूर्णिमा दोनों को ही पुराणादि शास्त्रो में विशेष पर्व के रूप में मन गया है | क्योंकि कार्तिक अमावस्या को प्रकाश पर्व (दीपावली) के रूप में तथा कार्तिक पूर्णिमा को महापुनीत ( बड़ी पवित्र ) तिथि के रूप में मनाया जाता है | अत: कार्तिक पूर्णिमा को किये गए स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना आदि का अनंत फल होता है | इस दिन गंगा स्नान तथा सायंकाल दीपदान का विशेष महत्व है | इसी कार्तिक पूर्णिमा को सायंकाल भगवान का मत्स्यावतार हुआ था, इस कारण इस दिन किये गए दान, व्रत जपादि का दस यज्ञों के सामान फल प्राप्त होता है | जैसा की पद्मपुराण में कहा गया है-
"वरन दत्वा यतो विष्णुर्मत्स्यरूपो तत:|
तस्याम् दत्तं हुतम जप्तं दशयज्ञफलम् स्मृतम ||"
उक्त वचन से स्पष्ट होता है की कार्तिक पूर्णिमा को ही भगवान के मत्स्यावतार का आभिर्भाव हुआ था | अत: इस कारण कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और भी बढ़ जाता है | इस दिन यदि कृतिका नक्षत्र युक्त पूर्णिमा तिथि हो तो यह महाकार्तिकी होती है| जो स्त्री पुरुष पूरे महीने कार्तिक मास स्नान करते है उनका नियम भी कार्तिक पूर्णिमा को पूरा हो जाता है | कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्राय: श्रीसत्यनारायण व्रत की कथा सुनने, सायंकाल में देव मंदिरों, पीपल का वृक्ष व तुलसी के पौधे के समीप दीपदान करने से व्यक्ति के सकल मनोरथ सिद्ध होते है | साथ ही साथ देशभर में कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान करने व दीपदान का विधान किया जाता है | ऐसा करने से मनुष्य पापों से निवृत हो जाता है | कशी में तो यह तिथि देवदीपावली महोत्सव के रूप में मनाई जाती है | अत: इस दिन स्नान ध्यान से निवृत होकर व्रत उपवास एवं हरिकीर्तन या पवित्र नदियों के संगम पर स्नान करने वाला भगवांन की विशेष कृपा का पात्र बन सकता है |


InformativeWebsites : 

Sunday, November 2, 2014

वृश्चिक राशि के शनि की दृष्टि- क्या बदलेगी आपका भविष्य ?

वृश्चिक राशि के शनि की दृष्टि- 
क्या बदलेगी आपका भविष्य ?
- Acharya Anupam Jolly


शनि एक राशि पर ढाई वर्ष रहता है | जब शनि जन्म राशि से बारहवे, पहले व दूसरे स्थानो में हो तो साढ़े साती होती है | यह साढ़े सात साल तक चलती है अत: इसे शनि की साढ़े साती कहते है | यह समय प्राय कष्ट दायक होता है | यथा -

" द्वादशे जन्मगे राशौ द्वितीये च शनैश्चर:|
सार्धानी सप्तवर्षाणि तदा दु:खैर्युतो भवेत् ||

शनि गोचर से बारहवे स्थान पर हो तो सर पर, जन्मराशि में हो तो हृदय पर, द्वितीये स्थान पर हो तो पैर पर उतरता हुआ अपना प्रभाव डालता है |
जन्म राशि से शनि चतुर्थ, अष्टम हो तो ढैया होती है, जो ढाई वर्ष चलती है | यह भी व्यक्ति के लिए कष्टकारी होती है |

इस वर्ष २ नवम्बर २०१४ की रात्रि से वर्ष समाप्ति दिनांक २० मार्च २०१५ तक शनि मार्गी व वक्री गति से वृश्चिक राशि में विचरण करेगा | इस वर्ष दिनांक २ नवम्बर २०१४ को रत ०८-५५ बजे कुम्भ राशि स्थित चन्द्रमा में ही शनि देव वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा | जिसके अनुसार मेषादि राशियों पर उसका प्रभाव निम्न प्रकार पड़ेगा |

मेष : मेष राशि वालो को अनावश्यक विवाद, मानसिक उद्वेग, लाभ कम, खर्चे की अधिकता बनी रहेगी |
वृषभ : व्यवसायिक सफलता, समाज में मान सम्मान में वृद्धि एवं मनोबल ऊँचा रहेगा |
मिथुन : मनोबल ऊँचा होगा तथा व्यवसाय में प्रगति के मार्ग प्रशस्त बनेगे, सद्विचरो की वृद्धि से धार्मिक कार्यो में रूचि बढ़ेगी |
कर्क : व्यापारिक स्थिति के साथ वाणी की कठोरता से बनते कार्यो में संघर्षप्रद साबित होगी |
सिंह : आपको शनि की लघु कल्याणकारी ढैय्या आने से कुछ पीड़ा व चिंताओं के साथ साथ धन का खर्च भी बढ़ रहा है |
कन्या : विपरीत परिस्तिथियाँ अनुकूल होंगी, जिससे रुके काम बनते दिखाई देंगे | साथ ही व्यापार में लाभ व मनोबल बढ़ेगा |
तुला : शनि की मद्यकालीन व उतरती साढ़ेसाती मध्यम फलप्रद रहेगी | व्यापार धंधो में धन लाभ होता रहेगा किन्तु शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना आवश्यक रहेगा | मान सम्मान के साथ नवीन कार्य की रूपरेखा बनेगी |
वृश्चिक : श्रम संघर्ष की अधिकता बनेगी, दांपत्य जीवन में तनाव, लाभ कम व खर्चे अधिकता एवं शारीरिक सुख हेतु सचेत रहना होगा |
धनु : शनि की प्रारम्भिक साढ़े साती लगने से प्रतिकूल स्थितियां बनेगी एवं धन व्यय के साथ मानसिक पीड़ा होगी |
मकर : शनि का राशि परिवर्तन समृद्धि कारक होगा, उच्चाधिकारियों से मेल मिलाप बढ़ेगा, नौकरी पेशा वालों की पदोन्नति के अवसर प्राप्त होंगे |
कुम्भ : साधारण फलप्रद, स्वजनो  व मित्रो का सहयोग प्राप्त होगा, परिश्रम व मेहनत का फल कम प्राप्त होगा |
मीन : स्वास्थ्य में सुधर किन्तु मानसिक चिंताओं का सामना करना पड़ सकता है एवं शारीरिक कष्ट व धनहानि होगी |