Monday, February 28, 2011

Planetary Remedies, ग्रह दोष निवारण



- ग्रह पीड़ा निवारक टोटके -

सूर्य
१॰ सूर्य को बली बनाने के लिए व्यक्ति को प्रातःकाल सूर्योदय के समय उठकर लाल पूष्प वाले पौधों एवं वृक्षों को जल से सींचना चाहिए।
२॰ रात्रि में ताँबे के पात्र में जल भरकर सिरहाने रख दें तथा दूसरे दिन प्रातःकाल उसे पीना चाहिए।
३॰ ताँबे का कड़ा दाहिने हाथ में धारण किया जा सकता है।
४॰ लाल गाय को रविवार के दिन दोपहर के समय दोनों हाथों में गेहूँ भरकर खिलाने चाहिए। गेहूँ को जमीन पर नहीं डालना चाहिए।
५॰ किसी भी महत्त्वपूर्ण कार्य पर जाते समय घर से मीठी वस्तु खाकर निकलना चाहिए।
६॰ हाथ में मोली (कलावा) छः बार लपेटकर बाँधना चाहिए।
७॰ लाल चन्दन को घिसकर स्नान के जल में डालना चाहिए।
सूर्य के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु रविवार का दिन, सूर्य के नक्षत्र (कृत्तिका, उत्तरा-फाल्गुनी तथा उत्तराषाढ़ा) तथा सूर्य की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

चन्द्रमा
१॰ व्यक्ति को देर रात्रि तक नहीं जागना चाहिए। रात्रि के समय घूमने-फिरने तथा यात्रा से बचना चाहिए।
२॰ रात्रि में ऐसे स्थान पर सोना चाहिए जहाँ पर चन्द्रमा की रोशनी आती हो।
३॰ ऐसे व्यक्ति के घर में दूषित जल का संग्रह नहीं होना चाहिए।
४॰ वर्षा का पानी काँच की बोतल में भरकर घर में रखना चाहिए।
५॰ वर्ष में एक बार किसी पवित्र नदी या सरोवर में स्नान अवश्य करना चाहिए।
६॰ सोमवार के दिन मीठा दूध नहीं पूना चाहिए।
७॰ सफेद सुगंधित पुष्प वाले पौधे घर में लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
चन्द्रमा के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु सोमवार का दिन, चन्द्रमा के नक्षत्र (रोहिणी, हस्त तथा श्रवण) तथा चन्द्रमा की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

मंगल
१॰ लाल कपड़े में सौंफ बाँधकर अपने शयनकक्ष में रखनी चाहिए।
२॰ ऐसा व्यक्ति जब भी अपना घर बनवाये तो उसे घर में लाल पत्थर अवश्य लगवाना चाहिए।
३॰ बन्धुजनों को मिष्ठान्न का सेवन कराने से भी मंगल शुभ बनता है।
४॰ लाल वस्त्र लिकर उसमें दो मुठ्ठी मसूर की दाल बाँधकर मंगलवार के दिन किसी भिखारी को दान करनी चाहिए।
५॰ मंगलवार के दिन हनुमानजी के चरण से सिन्दूर लिकर उसका टीका माथे पर लगाना चाहिए।
६॰ बंदरों को गुड़ और चने खिलाने चाहिए।
७॰ अपने घर में लाल पुष्प वाले पौधे या वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल करनी चाहिए।
मंगल के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु मंगलवार का दिन, मंगल के नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा) तथा मंगल की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

बुध
१॰ अपने घर में तुलसी का पौधा अवश्य लगाना चाहिए तथा निरन्तर उसकी देखभाल करनी चाहिए। बुधवार के दिन तुलसी पत्र का सेवन करना चाहिए।
२॰ बुधवार के दिन हरे रंग की चूड़ियाँ हिजड़े को दान करनी चाहिए।
३॰ हरी सब्जियाँ एवं हरा चारा गाय को खिलाना चाहिए।
४॰ बुधवार के दिन गणेशजी के मंदिर में मूँग के लड्डुओं का भोग लगाएँ तथा बच्चों को बाँटें।
५॰ घर में खंडित एवं फटी हुई धार्मिक पुस्तकें एवं ग्रंथ नहीं रखने चाहिए।
६॰ अपने घर में कंटीले पौधे, झाड़ियाँ एवं वृक्ष नहीं लगाने चाहिए। फलदार पौधे लगाने से बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
७॰ तोता पालने से भी बुध ग्रह की अनुकूलता बढ़ती है।
बुध के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु बुधवार का दिन, बुध के नक्षत्र (आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती) तथा बुध की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

गुरु
१॰ ऐसे व्यक्ति को अपने माता-पिता, गुरुजन एवं अन्य पूजनीय व्यक्तियों के प्रति आदर भाव रखना चाहिए तथा महत्त्वपूर्ण समयों पर इनका चरण स्पर्श कर आशिर्वाद लेना चाहिए।
२॰ सफेद चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिसकर उसमें केसर मिलाकर लेप को माथे पर लगाना चाहिए या टीका लगाना चाहिए।
३॰ ऐसे व्यक्ति को मन्दिर में या किसी धर्म स्थल पर निःशुल्क सेवा करनी चाहिए।
४॰ किसी भी मन्दिर या इबादत घर के सम्मुख से निकलने पर अपना सिर श्रद्धा से झुकाना चाहिए।
५॰ ऐसे व्यक्ति को परस्त्री / परपुरुष से संबंध नहीं रखने चाहिए।
६॰ गुरुवार के दिन मन्दिर में केले के पेड़ के सम्मुख गौघृत का दीपक जलाना चाहिए।
७॰ गुरुवार के दिन आटे के लोयी में चने की दाल, गुड़ एवं पीसी हल्दी डालकर गाय को खिलानी चाहिए।
गुरु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु गुरुवार का दिन, गुरु के नक्षत्र (पुनर्वसु, विशाखा, पूर्व-भाद्रपद) तथा गुरु की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

शुक्र
१॰ काली चींटियों को चीनी खिलानी चाहिए।
२॰ शुक्रवार के दिन सफेद गाय को आटा खिलाना चाहिए।
३॰ किसी काने व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिष्ठान्न का दान करना चाहिए।
४॰ किसी महत्त्वपूर्ण कार्य के लिए जाते समय १० वर्ष से कम आयु की कन्या का चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लेना चाहिए।
५॰ अपने घर में सफेद पत्थर लगवाना चाहिए।
६॰ किसी कन्या के विवाह में कन्यादान का अवसर मिले तो अवश्य स्वीकारना चाहिए।
७॰ शुक्रवार के दिन गौ-दुग्ध से स्नान करना चाहिए।
शुक्र के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शुक्रवार का दिन, शुक्र के नक्षत्र (भरणी, पूर्वा-फाल्गुनी, पुर्वाषाढ़ा) तथा शुक्र की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

शनि १॰ शनिवार के दिन पीपल वृक्ष की जड़ पर तिल्ली के तेल का दीपक जलाएँ।
२॰ शनिवार के दिन लोहे, चमड़े, लकड़ी की वस्तुएँ एवं किसी भी प्रकार का तेल नहीं खरीदना चाहिए।
३॰ शनिवार के दिन बाल एवं दाढ़ी-मूँछ नही कटवाने चाहिए।
४॰ भड्डरी को कड़वे तेल का दान करना चाहिए।
५॰ भिखारी को उड़द की दाल की कचोरी खिलानी चाहिए।
६॰ किसी दुःखी व्यक्ति के आँसू अपने हाथों से पोंछने चाहिए।
७॰ घर में काला पत्थर लगवाना चाहिए।
शनि के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शनिवार का दिन, शनि के नक्षत्र (पुष्य, अनुराधा, उत्तरा-भाद्रपद) तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

राहु
१॰ ऐसे व्यक्ति को अष्टधातु का कड़ा दाहिने हाथ में धारण करना चाहिए।
२॰ हाथी दाँत का लाकेट गले में धारण करना चाहिए।
३॰ अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए। सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है।
४॰ जमादार को तम्बाकू का दान करना चाहिए।
५॰ दिन के संधिकाल में अर्थात् सूर्योदय या सूर्यास्त के समय कोई महत्त्वपूर्ण कार्य नहीम करना चाहिए।
६॰ यदि किसी अन्य व्यक्ति के पास रुपया अटक गया हो, तो प्रातःकाल पक्षियों को दाना चुगाना चाहिए।
७॰ झुठी कसम नही खानी चाहिए।
राहु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शनिवार का दिन, राहु के नक्षत्र (आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा) तथा शनि की होरा में अधिक शुभ होते हैं।

केतु
१॰ भिखारी को दो रंग का कम्बल दान देना चाहिए।
२॰ नारियल में मेवा भरकर भूमि में दबाना चाहिए।
३॰ बकरी को हरा चारा खिलाना चाहिए।
४॰ ऊँचाई से गिरते हुए जल में स्नान करना चाहिए।
५॰ घर में दो रंग का पत्थर लगवाना चाहिए।
६॰ चारपाई के नीचे कोई भारी पत्थर रखना चाहिए।
७॰ किसी पवित्र नदी या सरोवर का जल अपने घर में लाकर रखना चाहिए।
केतु के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु मंगलवार का दिन, केतु के नक्षत्र (अश्विनी, मघा तथा मूल) तथा मंगल की होरा में अधिक शुभ होते हैं।


Log on www.astrologynspiritualism.com for astrology, divine, spiritualism studies
International School of Astrology and Divine Sciences ( ISADS )

Tuesday, February 15, 2011

Selected Mantra

Mantras ( मन्त्र (
Mantras are Sanskrit stanzas which have special effect on us and the environment. These always bring peace, prosperity and wellness to all. If recited with the proper pronunciation mantras can perform miracles. In scriptures there are mention of specific mantras which can cure diseases which are declared incurable.
Here are few such mantras for our daily use, which can be recited in the early morning to achieve overall wellness at mental and physical level. Even listening to these regularly will have good effect on the environment and wellness.
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षिय माऽमृतात् ॥

OM tryambaka.n yajaamahe suga.ndhi.n puShTivardhanam
urvaarukamiva bandhanaanmrutyormukshiya maa.amRRitaat

I worship Lord Shiva the three-eyed one, who is full of fragrance and who nourishes all beings; may He liberate me from the death (of ignorance), for the sake of immortality (of knowledge and truth), just as the ripe cucumber is severed from its bondage (the creeper).
 

[ Note: Maha Mrityunjaya Mantra - Reciting or listening this mantra (3 to 108 times) in early morning is extremely benificial. This mantra protects from accidents and misfortunes of all kinds, has great curative effect even for deseases declared incurable. ] 

--
ॐ --
ॐ भुर्भुवः स्वः तत्सोवितुवरेण्यं । भर्गोदेवस्य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात् ॥

OM bhurbhuvaH svaH tatcoviturvareNya.n
bhargodevasya dhiimahi dhiyo yonaH prachodayaat

O God, you are the giver of life, the remover of pain and sorrow, the bestower of happiness; O Creator of the Universe, may we receive your supreme, sin destroying light; may you guide our intellect in the right direction.
 

[ Note: Gayatri Mantra - Reciting or listening this mantra (3 to 108 times) in early morning is extremely benificial. ] 

--
ॐ --
ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटिसम्स्प्रभः । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
OM vakratuNDa mahaakaaya suuryakoTisamsprabhaH
nirvighna.n kuru me deva sarvakaaryeShu sarvadaa

O Lord Ganesha, of the large body, the curved trunk, who shines like a million suns, may you always make my work free from obstacles.
 

[ Note: Shree Ganesh Mantra - This is recited before starting any good work to avoid obstacles. ] 

--
ॐ --
ॐ शुभं कुरुत्वं कल्याणं आरोग्यं धनसंपदः । शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिनमोऽस्तु ते ॥ दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योति जनार्दनः । दीपो हरतु मे पापं संध्यादीप नमोऽस्तु ते ॥ भो दीप ब्रह्मारूपस्त्वं ज्योतिषां प्रभुरव्ययः । आरोग्यं देहि पुत्रांश्च मतिं स्वच्छां हि मे सदा ॥ स्वेरस्तं समारभ्य यावत्सूर्योदयो भवेत् । यस्य तिष्ठेद्गृहे दीपस्तस्य नास्ति दरिद्रता ॥
OM shubha.n kurutva.n kalyaaNa.n aarogya.n dhanasampadaH, shatrubuddhivinaashaaya diipajyotinamo.astu te
diipajyotiH parabrahma diipajyoti janaardanaH, diipo haratu mepaapa.n sa.ndhyaadiipa namo.astu te
bho diipa brahmaaruupastva.n, aarogya.n dehi putraa.nshcha mati.n svachchhaa.n hi me sadaa
sverasta.n samaarabhya yaavatsuuryodayo bhavet, yasya tiShThedgRRihe diipastasya naasti daridrataa
 [ Note: Evening Lamp (दीप / diipa) Lighting Mantra - This is recited while lighting a candle or दीप (diipa) in evening. ] 

--
ॐ --
ॐ गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥

OM gururbrahmaa gururviShNuH gururdeva maheshvaraH
guru saakshaat parabrahma tasmai shriigurave namaH

My salutation to my teacher, who to me are Brahma, Vishnu and Maheswara, the direct Parabrahma, the supreme reality. 
 

[ Note: Salutation To Teacher Mantra - This is recited to pay salutation to teacher or गुरु (guru) in evening. ] 

--
ॐ --
ॐ ब्रह्मामुरारित्रिपुरांतकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च । गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम् ॥
OM brahmaamuraaritripuraa.ntakaarii bhaanuH shashii bhuumisuto budhashcha
gurushcha shukraH shaniraahuketavaH kurvantu sarve mama suprabhaatam

Let Brahma, Vishnu (Murari) and Shiva (Tripurantakari), the Sun (Bhanu), the Moon (Shashi), Mars (Bhumisuta the son of earth), Buddha, Guru (teacher) Sukra, Shani and Ketu make the morning asupicious for me.
 

[ Note: This is recited in the morning to make the day auspicious and fruitful. ] 

--
ॐ --
ॐ सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि । विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥

OM sarasvatii namastubhya.n varade kaamaruupiNi
vidyaarambha.n kariShyaami siddhirbhavatu me sadaa

O Goddess Saraswati, I bow down humbly before you, the bestower of all wishes; As I commence my studies, may there be success for ever.
 

[ Note: This is recited to salute Goddess Saraswati before starting studies. ] 

--
ॐ --

ॐ या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्र वस्त्रावृता । या वीणा वर दण्ड मण्डितकरा या श्वेत पद्मासना ॥ या ब्रह्माच्युत सङ्कर प्रभृतिभिः देवैः सदा वन्दिता । सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाड्यापहा ॥


OM yaa kundendu tuShaarahaara dhavalaa yaa shubhra vastraavRRitaa
yaa viiNaa vara daNDa maNDitakaraa yaa shveta padmaasanaa
yaa brahmaachyuta saN^kara prabhRRitibhiH devaiH sadaa vanditaa
saa maa.n paatu sarasvatii bhagavatii niHsheSha jaaDyaapahaa

Oh Goddess Saraswati, pure and radiant as the full moon and frost, wearing a garland of jasmine flowers, in your white robes, seated on lotus throne; with the veena on your lap; O one who is worshiped by Brahma, Vishnu and Maheswara (Shive), may you bless and protect me and remove the lazyness and sloth in me.
 

[ Note: This is recited while worshiping Goddess Saraswati. ] 

--
ॐ --


Study of mantras @ http://www.astrologynspiritualism.com/ International School of Astrology and Divine Sciences

Saturday, February 5, 2011

PEACE MANTRAS

PEACE MANTRAS

Peace Mantras or शान्ति मन्त्र (shaanti mantra) are Sanskrit stanzas which if recited regularly brings peace and prosperity at different levels. Even listening to these regularly brings peace and wellness. Each mantra is followed by the word शान्तिः (shaantiH) or peace three times, representing peace at three different levels i.e, आध्यात्मिक (aadhyaatmika) peace or peace at mental and physical level; आधिभौतिक (aadhibhautika) peace or peace with five elements - earth, water, fire, air and ether; and आधिदैविक (aadhidaivika) peace or peace with God to protect us from fury of God and nature.

Followings are few such mantras for our well being in our daily life. Reciting or listening these daily will revive our inner peace and wellness.

 
ॐ ध्यौः शान्तिः अन्तरिक्ष शान्तिः आपः शान्तिः औषधयः शान्तिः वनस्पतयः शान्तिः । विश्वेदेवाः शान्तिः व्रह्म शान्तिरेव शान्तिः सा मा शान्तिरेधि ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः !!

OM dhyauH shaantiH antariksha shaantiH aapaH shaantiH
auShadhayaH shaantiH vanaspatayaH shaantiH
visvedevaaH shaantiH shaantireva shaantiH saa maa shaantiredhi
OM shaantiH shaantiH shaantiH

May there be peace in heaven, may there be peace in sky; may there be peace on the earth, may there be peace in waters; may there be peace in herbs, may there be peace in vegetations; may there be peace in all the Gods, may there be peace in entire Bramha (creation); may there peace everywhere; may there be peace and only peace; may that peace embrace me. OM !! Peace Peace Peace

--
ॐ --
ॐ सर्वेषां स्वस्तिर्भवतु सर्वेषां शान्तिर्भवतु । सर्वेषां पूर्णं भवतु सर्वेषां मङ्गलं भवतु ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः !!

OM sarveShaa.n svastirbhavatu sarveShaa.n shaantirbhavatu
sarveShaa.n puurNa.n bhavatu sarveShaa.n maN^gala.n bhavatu
OM shaantiH shaantiH shaantiH

May all become fortunate, may all attain peace, - may all achieve perfection, and may all be blessed. OM !! Peace Peace Peace

--
ॐ --
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः । सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाक् भवेत् ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः !!

OM sarve bhavantu sukhinaH sarve santu nitaamayaH
sarve bhadraaNi pashyantu maa kashchit duHkhabhaak bhavet
OM shaantiH shaantiH shaantiH

May all attain peace, may all be healthy - may all enjoy good fortune, may none suffer misery and sorrow. OM !! Peace Peace Peace

--
ॐ --
ॐ असतो मा सद्गमय तमसो मा ज्योतिर्गमय मृत्योर्माऽमृतं गमय । ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

OM asato maa sadgamaya tamaso maa jyotirgamaya mRRityormaa.amRRIta.n gamaya
OM shaantiH shaantiH shaantiH

O Lord, lead me from the unreal to the ultimate truth, from the darkness to light, - and from the death of ignorance to the imortality of knowledge. OM !! Peace Peace Peace

--
ॐ --
ॐ सह नाववतु सह नौ भुनक्तु सह विर्यं करवावहे तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै ॥ शान्तिः शान्तिः शान्तिः !!

OM saha naavavatuu saha nau bhunaktu sahs virya.n karavaavahe
tejasbinaavadhiitamastu maa vidviShaavahai
OM shaantiH shaantiH shaantiH

May lord protect us both the teacher and the taught, may he make us both to - enjoy the Supreme, may we both discover the inner truth of scriptures. OM !! Peace Peace Peace

--
ॐ --
ॐ शन्नो मित्रः शं वरुणः शं नो भवत्यर्यमा शंन इन्द्रो बृहस्पतिः शंनो विष्णुरुरुक्रमः नमो ब्रह्मणे नमस्ते वायो त्वमेव प्रत्यक्षं ब्रह्मासि त्वामेव प्रत्यक्षं ब्रह्मवदिष्यामि ऋतं वदिष्यामि सत्यंवदिष्यामि तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतुमाम् अवतुवक्तारं ॥ ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः !!

OM shanno mitraH sha.n varuNaH sha.n bhavatyaryamaa
sha.nna indro bRRihaspatiH viShNururukramaH nomo brahmaNe namaste vaayo
tvameva pratyaksha.n brahmaasi tvaameva pratyaksha.n brahmavadiShyaami
RRita.n vadiShyaami satya.nvadiShyaami
tanmaamavatu tadvaktaaramavatu avatumaam avatuvaktaara.n
OM shaantiH shaantiH shaantiH

May Sun be blissful to us, may Varuna be blissful to us, may Aryaman be blissful to us. May Indra and Bruhaspati be blissful to us, may Vishnu be blissful to us. Salutation to Brahman, salutation to O Vayu. You only are the direct Brahman, I shall call you rightousness, I shall call you the truth. May he protect me, may he protect the teacher. Protect me, protect the teacher. OM !! Peace Peace Peace

--
ॐ --
ॐ पूर्णमदः पूर्णमिदं पूर्णात्पूर्णमुदच्चते । पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते ॥ शान्तिः शान्तिः शान्तिः !!

OM puurNamadaH puurNamida.n puurNaatpuurNamudachchate
puurNasya puurNamaadaaya puurNamevaavashiShyate
OM shaantiH shaantiH shaantiH

That is Whole, this is Whole, from the Whole the Whole becomes manifest. When Whole from the is Whole taken, what remains is again the Whole. OM !! Peace Peace Peace

--
--
ॐ भद्रं कर्णभिः श्रुणुयाम देवाः भद्रंपश्येमाक्षभिर्यत्राः स्थिरै रंर्गैस्तुष्टुवागंसस्तनूभिः व्यशेमदेवहितं यदायुः स्वस्तिन इन्द्रो वृध्धश्रवाः स्वस्तिनः पूषा विश्ववेदाः स्वस्तिनस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्तिनो बृहस्पतिर्दधातु ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः !!

OM bhadra.n karNabhiH shruNuyaama devaaH
bhadra.npashyemaakshabhiryatraaH sthirai ra.nrgaistuShTuvaaga.nsastanuubhiH vyashemadevaahita.n yadaayuH
svastina indro svastinaH vRRishshashravaaH svastinaH puuShaa vishvadevaaH
svastinastaarkshyo ariShTanemiH svastino bRRihaspatirdadhaatu
OM shaantiH shaantiH shaantiH

Oh God, may we here auspicious words with the ears, while worshipping, may we see auspicious things with the eyes while praising the Gods with steady limbs, may we enjoy a life benificial to the Gods, may Indra of ancient fame be auspicious to us, may the all knowing earth be propitious to us, may Garuda the destroyer of evil be blissful to us, may Bruhaspati ensure our welfare. OM !! Peace Peace Peace

--
ॐ --

Log on our website for learn spiritual studies at http://www.astrologynspiritualism.com/